“सुनाैलाे बिहानी”


पुण्यप्रसाद घिमिरे
बैत्यश्वर-६ दाेलखा

छाेड न सिरानी,
म भन्छु कहानी।
कर्तव्य सुनामी,
सुनाैलाे बिहानी।

यात्रा घाम पानी,
हे बाबु हे नानी।
कुभलाे नठानी,
सुनाैलाे बिहानी।

न झाँक्री न धामी,
बन्दैन अज्ञानी।
भानुकाे जवानी ,
सुनाैलाे बिहानी।

प्रभात नजानी,
सुकर्म नछानी।
चुक्दछ निशानी,
सुनाैलाे बिहानी।